नई दिल्ली, मई 30 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि ‌सरकार किसी मठाधिपति के धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष कार्यों को स्थायी रूप से अलग नहीं कर सकती है। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मठाधिपति के धर्मनिरपेक्ष कार्यों को स्थायी रूप से सरकारी अधिकारी को सौंपना 'महंत पद' की अवधारणा का खंडन होने के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद-26 का उल्लंघन है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और एस‌.एस. चदुरकर की पीठ ने कहा कि 'महंत पद की अवधारणा' में आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों तरह की जिम्मेदारियां शामिल हैं। पीठ ने तिरुपति में ऐतिहासिक 'श्री स्वामी हाथीरामजी मठ' के मठाधिपति के पद से अर्जुन दास को हटाने के आंध्र प्रदेश सरकार फैसले को रद्द करते हुए टिप्पणी की। पीठ ने सरकार द्वारा मठ का प्रशासन चलाने के लिए प्रशासक नियुक्त करने का आदेश भी रद्द कर दिया। सुप्...