भभुआ, जनवरी 27 -- चौक-चौराहों पर पसीना बहाने वाले सत्तू-भूजा दुकानदार रोज़ी-रोटी बचाने की कर रहे मशक्कत शहर के चौक-चौराहों से उठती छोटे-छोटे कारोबारी की आवाज़ कारोबार की बयां कर रही हकीकत (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। सत्तू और भूजा सिर्फ खाने-पीने की चीजें नहीं, बल्कि शहर की परंपरा, मेहनतकश लोगों की पहचान और आमजन की थाली का भरोसेमंद सहारा हैं। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, बस पड़ाव, बाजारों और गलियों में दशकों से सत्तू-भूजा बेचने वाले छोटे कारोबारी आज गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। बढ़ती महंगाई, घटती आमदनी और प्रशासनिक सख्ती ने इस देसी कारोबार की कमर तोड़ दी है। सुबह से देर शाम तक धूप, धूल और भीड़ में खड़े होकर सत्तू-भूजा बेचने वाले दुकानदारों की मेहनत का सही मोल नहीं मिल पा रहा। चना, जौ, मक्का, मूंगफली, तेल और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, ल...