बस्ती, जून 18 -- बस्ती, हरिशंकर त्रिपाठी। इमाम हुसैन की पहली मजलिस मदीना स्थित मस्जिदे-नबवी में बरपा हुई थी। उस मजलिस के जाकिर खुद पैगम्बरे-इस्लाम थे और सोगवार उनके असहाबे बावफा थे। कर्बला की घटना के बाद से पैगम्बर के मानने वाले नबी की सुन्नत समझ कर हुसैन की मजलिस बरपा करते हैं और आंसू बहाते हैं। यह बातें इमामबाड़ा शाबान मंजिल में पहली मोहर्रम को आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए वसीका अरबिक कॉलेज अयोध्या से पधारे मौलाना मोहम्मद हैदर खां ने कहीं।मौलाना ने कहा कि एक दिन पैगम्बर मस्जिद में बैठे हुए छोटे नवासे इमाम हुसैन से प्यार कर रहे थे। मस्जिद उनके चाहने वालों से भरी हुई थी। यह भी पढ़ें- मोहर्रम : इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू इसी दौरान जिबरील फरिश्ता आता है और फरमाया कि आप जिस नवासे से इतना प्यार कर रहे हैं, उसे आप ही का कलमा पढ़ने ...