जमशेदपुर, फरवरी 18 -- मसीही विश्वासियों का 40 दिनों का महाउपवास काल (लेंट) राख बुधवार, 18 फरवरी से शुरू होगा और ईस्टर तक चलेगा। इस अवधि में ईसाई समुदाय के लोग उपवास रखेंगे और विशेष प्रार्थनाओं में भाग लेंगे। शहर के प्रमुख चर्चों में विशेष मिस्सा के दौरान विश्वासी प्रभु यीशु मसीह के दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान पर गहन चिंतन करेंगे। इस अवसर पर माथे पर खजूर के पत्तों की राख का निशान लगाया जाएगा। ऐश वेडनेसडे ईसाई धर्म में पश्चाताप और उपवास का दिन माना जाता है। इस दिन विश्वासी प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हैं और पूरी तरह से मांसाहार त्यागते हैं। इस 40-दिनीय अवधि में लोग पवित्र बाइबिल का ध्यान और आराधना करते हुए अपने किए गए पापों की क्षमा मांगते हैं। भिलाई पहाड़ी चर्च के फादर डेविड विंसेंट ने बताया कि राख को माथे पर धारण कर ईसाई यह प्रण ले...