वाराणसी, फरवरी 26 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी में मसाने की होली पारंपरिक है अथवा नहीं इसपर बहस जारी है। हरिश्चंद्र घाट स्थित अघोर पीठ के पीठाधीश्वर कपाली बाबा ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि महादेव की नगरी में नागा साधु, किन्नर समुदाय, अघोर साधक एक साथ इस अलौकिक परंपरा को साकार करते हैं। उन्होंने कहा काशी भगवान शिव द्वारा स्थापित अविमुक्त क्षेत्र है यह सामान्य नियमों और वर्जनाओं को स्वीकार नहीं करती। काशी में मृत्यु नहीं, मोक्ष है। एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मसाने की होली में कुछ अवांछित प्रवृत्तियों के प्रवेश की शिकायतें सामने आई थीं। गत वर्ष से संत समाज एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इसमें आवश्यक सुधार किए गए हैं। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और शिवभक्ति के वातावरण में स्वयं को शिवमय अनुभव करना है। व...