अररिया, जून 20 -- कुर्साकांटा, निज प्रतिनिधि। खेतीबाड़ी और पशुपालन भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये दोनों एक दूसरे का पूरक है। फसलें पशुओं के लिए चारा प्रदान करती है और पशुओं का गोबर खेती के लिए उत्तम जैविक खाद बनाती है। पहले के समय में जिले किसान काफी संख्या में गाय भैंस पालते थे। गाय व भैंस अत्यधिक संख्या में पालने के कारण काफी मात्रा में दूध सस्ते और सुलभ तरीका से उपलब्ध होता था। लोग दूध आहार के रुप में भी अधिक मात्रा में लेते थे। बदलते परिस्थति के कारण किसानों का पिछले एक दशक से पशुपालन के प्रति मोह भंग हो गया है। अब किसान गाय व भैस कम पाल रहे हैं। लोग इसे अधिक मेहनत और कम मुनाफे वाला काम समझने लगे हैं। गाय व भैंस की कमी के कारण दूध कम मिल रहा है। इस कारण लोग आहार के रुप में भी दूध कम ले रहे हैं। स्थिति का अंदाजा इस बात से भी ...