बिहारशरीफ, मई 12 -- मलमास मेला में सिख धर्म की भी गहरी आस्था 1506 ईस्वी में राजगीर पहुंचे थे गुरु नानक देव, चरण स्पर्श से शीतल हुआ था नानक कुंड फोटो: गुरुद्वारा: गुरुद्वारा राजगीर। राजगीर, निज संवाददाता। राजगीर का ऐतिहासिक मलमास मेला केवल सनातन धर्म की आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि सिख धर्म में भी इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि प्रथम सिख गुरु गुरु नानक देव जी 1506 ईस्वी में मलमास मेला के दौरान राजगीर पहुंचे थे और उन्होंने अपने दिव्य स्पर्श से एक उष्ण जलकुंड को शीतल कर दिया था। तभी से वह कुंड गुरु नानक कुंड के नाम से प्रसिद्ध हो गया। सनातनी सिख सभा पटना साहिब के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह निषाद ने बताया कि मलमास मेला धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है तथा इसका महत्व सनातन और सिख, दोनों धर्मों म...