लखनऊ। रजनीश रस्तोगी, अगस्त 18 -- ;यूपी की राजधानी लखनऊ में मरीजों की जिंदगी से जुड़े दवा कारोबार में मोटे कमीशन का खेल चल रहा है। कमशीनखोरी नकली दवाओं के नेटवर्क को बढ़ाने का जरिया बनता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से नई मेडिकल दुकान जोड़ने वाले कर्मचारियों को 30 से 40 फीसदी तक कमीशन दिया जाता था। यही लालच उन्हें लगातार नई दुकानों तक पहुंच बनाने के लिए प्रेरित करता था। आरोप हैं कि दुकानदार नकली दवाओं के बारे में जानते हैं। फिर भी कमाई के लालच में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। लखनऊ में करीब 4000 फुटकर और 3000 थोक दवा दुकाने हैं। इतने बड़े बाजार में किसी एक दुकान के जरिए संदिग्ध दवाओं की सप्लाई शुरू होने पर उसके आगे कई दुकानों तक पहुंचने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी ह...