मरना पसंद, डरना नहीं; 5 महीने में 23वीं फांसी की सजा देकर जज रवि दिवाकर ने किसे चेताया?
नई दिल्ली, सितम्बर 8 -- मैं मरना पसंद करूंगा, डरना या डरपोक जज कहलाना नहीं"। ये शब्द मुजफ्फरनगर के अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के उस ऐतिहासिक फैसले के हैं, जिसमें उन्होंने पत्नी की निर्मम हत्या करने वाले नदीम को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। पांच महीने के भीतर 23वीं फांसी की सजा सुनाकर चर्चा में आए जज रवि दिवाकर ने अपने फैसले में माफियाओं, गैंगस्टरों और न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले असमाजिक तत्वों को सख्त चेतावनी दी है।माफियाओं बाहुबलियों को राजनीतिक और जातिय संरक्षण न्यायाधीश ने अपने फैसले में लिखा किया कि वेस्ट यूपी के कुछ बड़े माफिया और बाहुबलियों को राजनीतिक और जातीय संरक्षण मिला हुआ है। इन माफियाओं ने जज को धमकी दी है कि अभी पत्रावलियों को हटवाया है, यदि हम लोगों को लेकर कोई टिप्पणी की तो कोर्ट चेंज ...
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