नई दिल्ली, जून 14 -- पंकज कुमार पाण्डेय नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस में आया सियासी भूचाल ममता बनर्जी की सियासी पारी में सबसे बड़ी चुनौती बनकर आया है। उनके अपने लोग ही उनपर इस कदर कठोर हो गए हैं कि कोई ममता से बात करने को भी राजी नहीं। टीएमसी सुप्रीमो के करीबियों का कहना है कि बागियों का रिमोट कंट्रोल कहीं और है । यह भी पढ़ें- टीएमसी के बागी गुट का नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय का ऐलानतृणमूल का घटनाक्रम तृणमूल का घटनाक्रम केवल दल-बदल का मामला नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व और नेतृत्व की परीक्षा भी है। यदि बागी गुट के दावों को संवैधानिक मान्यता मिल जाती है, तो ममता बनर्जी की पार्टी संगठनात्मक और संसदीय दोनों स्तरों पर कमजोर हो जाएगी। ममता के सामने दो ही विकल्प हैं। वे कांग्रेस में विलय करें या फिर नए सिरे से पार्टी को खड़ा करें...