दरभंगा, जून 2 -- अलीनगर। मन ही मनुष्य के बंधन और मुक्ति का कारण है। मन संसार मात्र के विषयों में उलझा हो तो बंधन है। इसके विपरीत यदि मन सांसारिक मोह से हटकर सद्गुरु के चरणों में लग जाए तो सहज से सद्गति (मोक्ष) की प्राप्ति हो जाती है। यदि कोई प्राणी सीधे परमात्मा में मन लगाने में समर्थ नहीं हो तो संत-महात्मा का संग और सत्संग का श्रवण करना चाहिए। संत-महात्मा सद्गुरु कबीर (परमात्मा) के स्वरूप और महिमा का श्रवण कराकर मन को सीधे संत सम्राट सद्गुरु कबीर के शरणागत में लगाते हैं। ये बातें जयंतीपुर-जौघट्टा कबीर आश्रम में संत सम्राट सद्गुरु कबीर प्राकट्य (जयंती) दिवस पर आयोजित सत्संग दर्शन के अवसर पर श्वेत ध्वजारोहण करते हुए रोसड़ा मठ के आचार्य महंत विद्यानंद शास्त्री साहेब ने कही।

संत कबीर का मार्गदर्शन उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते भौतिक सुखों के ब...