आगरा, मई 16 -- नगलापदी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य रामकृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के हृदय को पवित्र करती है। इससे भय, विकार और अवसाद दूर हो जाते हैं। नारायण हृदय में विराजमान हो जाते हैं। इससे मनुष्य जीवन का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि मन और वाणी की शुद्धता के बिना भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती। भगवान की कृपा पाने के लिए मन, कर्म और वचन से सत्य का साथ देना चाहिए। प्रभु का नाम निरंतर जपते रहना चाहिए। आचार्य रामकृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान के 24 अवतारों और समुद्र मंथन की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के समान हैं। इनके बीच निरंतर मंथन चलता रहता है। कथा में नत्थीलाल मालोनिया, परीक्षित अजय कान्त मालोनिया, लता कान्त, यज्ञपति सतीश चन्द्र,...