बागपत, दिसम्बर 2 -- बड़ौत। मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अतिथि भवन में धर्मसभा आयोजित की गई। जिसमें मुनि सौरभ सागर महाराज ने मंगल प्रवचन किए। जैन मुनि ने कहा कि साधु और गृहस्थ के अपने अपने कर्तव्य हैं। शास्त्रों के अनुसार साधु को 28 मूल गुणों का पालन करना आवश्यक है।परंतु समय के अनुसार उसमें भी शिथिलता आ जाती हैं। इसी तरह गृहस्थ भी समय के अनुसार शिथिलता की ओर जा रहा है। भगवान आदिनाथ ने कहा कि तीर्थंकर को चतुर्थ काल में मोक्ष हो सकता है। जबकि वह स्वयं तृतीय काल में ही मोक्ष गए। तीर्थंकर को पुत्रियां नहीं होती, जबकि उनकी स्वयं दो पुत्रियां थी। सभी तीर्थंकर सम्मेद शिखर से मोक्ष जायेंगे, जबकि वहां से केवल 20 तीर्थंकर ही मोक्ष गए। संचालन अमित जैन ने किया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि समाज द्वारा पंचकल्याणक में मा...