वाराणसी, जनवरी 5 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मनुष्य को पतन की ओर पहुचाने वाले कर्मों से बच कर रहना चाहिए। कुसंग का परिणाम कितना भयावह होता है यह अजामिल के जीवन से पता चलता है। अजामिल एक सदाचारी ब्राह्मण था लेकिन कुसंग में बिगड़ गया। ये बातें साध्वी प्रेमलता ने कहीं। वह मंडुवाडीह स्थित गणेश मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि ईश्वर अपनी कृपा से भक्तों का उद्धार करते हैं। पापी से पापी, पतित से पतित व्यक्ति भी नारायण नाम का आश्रय ले तो सद्गति हो जाती है। जिसके पास अपना कोई बल नहीं है, उस निराश्रय के भगवान होते हैं। इसलिए किसी भी नर-नारी को निराश नहीं होना चाहिए। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए। जीवन में कोई गलती हो गई हो, कोई ताप पाप हो तो निराश मत होइए। पूजा पा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.