गोंडा, अप्रैल 2 -- रुपईडीह, संवाददाता। मां गंगा में पवित्र और अपवित्र सब बहता है किंतु कोई मां गंगे को अपवित्र नहीं कहता। जो समर्थ होता है उसे कोई दोष आरोपित नहीं करता है। परंतु यह जीवों पर लागू नहीं होता, यह केवल अग्नि, जल, और सूर्य पर ही लागू होता है। मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। सदैव प्रभु के शरण में रहना चाहिए। व्यक्ति को अपने मधुर एवं ओजस्वी वचनों से प्रसन्न रखना चाहिए। यह बातें उज्जैन के स्वामी प्रणव पुरी ने आर्यनगर में आयोजित श्रीराम कथा के पहले दिन कहीं। स्वामी प्रणव पुरी ने अधिवक्ता स्वर्गीय गंगा प्रसाद मिश्र की स्मृति में आयोजित चार दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन प्रवचन करते हुए कहा कि जीवात्मा कभी परमात्मा के बराबर नहीं हो सकती। व्यक्ति को परमात्मा के शरण में रहकर भक्ति भजन करनी चाहिए। भगवान श्री रामचंद्र जी के जन्मोत्...