वाराणसी, जनवरी 4 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। अहंकार मनुष्य के पतन का प्रमुख कारण है। देव-दानव-मानव जिसने भी अहंकार किया उसका विनाश निश्चित हुआ। अंतत: अहंकारी को श्रीराम की शरण में आना पड़ा। तभी उसका उद्धार हुआ। जयंत का जानकी को चोंच मारने का प्रसंग इंद्र पुत्र के अहंकार और भगवान राम के न्याय को दर्शाता है। ये बातें काशी पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राम कमलाचार्य वेदांती ने कहीं। वह जगद्गुरु रामानंदाचार्य के 726वें प्राकट्य महोत्सव के अवसर पर श्रीरामानंद विश्व हितकारिणी परिषद और श्रीवैष्णव विरक्त संत समाज की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन शनिवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अहंकार के कारण जयंत ने कौवे का रूप धारण कर माता सीता के पैरों में चोंच मारी थी। परिणाम यह हुआ कि प्रभु श्रीराम ने तिनके का ब्रह्मास्त्र बनाकर उसके पीछे छोड़ दि...