गिरडीह, फरवरी 28 -- जमुआ, प्रतिनिधि। जमुआ प्रखंड में मनरेगा के मैटेरियल मद में करीब चार करोड़ रुपये के कथित बंदरबांट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि बिना वास्तविक सामग्री आपूर्ति के सिर्फ कागजी वाउचर के सहारे सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि माल सरकार का और मौज कुछ लोगों की योजना की मंशा को खुली चुनौती दी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, प्रखंड में सक्रिय करीब आठ वेंडरों में से अधिकांश के पास न तो पंजीकृत निर्माण सामग्री की दुकान है और न ही खनन से जुड़ा वैध पट्टा। इसके बावजूद सीमेंट, छड़, गिट्टी, मोरम और बालू की आपूर्ति के नाम पर बिल समायोजित किए जा रहे हैं। बालू को लेकर पूरे झारखंड में टेंडर प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के बावजूद भुगतान होना गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पशु शेड नि...
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