बिजनौर, जुलाई 28 -- वर्ष 2008 में बिजनौर गंगा बैराज से शुरू हुई मध्य गंगा नहर फेज-2 परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। मुरादाबाद, संभल और अमरोहा के किसानों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई इस परियोजना में डिवाटरिंग कार्य के भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर विजिलेंस की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।

सिंचाई विभाग का डिवाटरिंग कार्य सिंचाई विभाग के खंड सात के अन्तर्गत मध्य गंगा नहर फेज-2 की तली को पूरी तरह पक्का बनाया गया, ताकि पानी दूसरों जिलों तक पहुंच सके। नहर के निर्माण के दौरान खादर क्षेत्र में बरसाती नालों के पानी की निकासी के लिए मजबूत साइफन बनाए गए। चूंकि क्षेत्र में भूजल स्तर काफी ऊंचा है, इसलिए निर्माण से पहले डिवाटरिंग प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें हजारों पाइप और मोटरों के जरिए पानी निक...