नई दिल्ली, जनवरी 7 -- सु्प्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर अदालतों को हर स्तर पर हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जाती है और मध्यस्थता निर्णयों को उसके समक्ष चुनौती दी जाती है, तो यह मध्यस्थता कानून के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगा। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996, एक विशेष अधिनियम है जिसका उद्देश्य संविदात्मक या वाणिज्यिक विवादों को अदालत के न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ मध्यस्थता के माध्यम से हल करना है। शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के मार्च 2021 का फैसला रद्द करते हुए आई। अदालत ने कहा कि हम यह बताना उचित समझते हैं कि यह अधिनियम एक विशेष अधिनियम है, जिसका उद्देश्य अदालत के न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ, या यदि संभव हो तो अदालत के हस्तक्षेप के बिना, मध...