रांची, अप्रैल 12 -- रांची। मधुमंजूषा हेहल में मासिक सत्संग में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक छह घंटे का अखंड कीर्तन संपन्न हुआ। उसके बाद कीर्तन, गुरु पूजा साधना संपन्न हुई। आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने प्रवचन करते हुए कहा कि परम पुरुष नित्यम, शुद्धम, निराभासम, निराकाम, निरंजनम, नित्य बोधम और सत चित आनंदम है। ऐसे ही परम पुरुष गुरु रूप में तरक ब्रह्म बनकर आते हैं। भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति कराकर मोक्ष देने का काम करते हैं। आज के सत्संग में करीब 200 श्रद्धालु उपस्थित थे। इसमें आचार्य मंत्र चैतन्यानंद, प्रचेतनंद दीदी लोकातीता, दीदी संजू, डॉ. करुणा सहदेव, विजयी, तत्विक रतन, दनेश्वर, पंचु आदि उपस्थित थे

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