मधुबनी, फरवरी 1 -- मधुबनी। केंद्रीय बजट 2026 में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को लेकर की गई घोषणाएं मधुबनी के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भूली हुई विरासत की वापसी का संकेत भी हैं। कभी यहां के गांवों में हर घर में चरखा चलता था। महिलाएं सूत कातती थीं, पुरुष बुनाई करते थे और खादी के धागों से परिवार की आजीविका चलती थी। खादी संघ केवल संस्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करते थे। समय बदला। मशीन निर्मित कपड़ों और रेडीमेड परिधानों ने हथकरघा को हाशिए पर धकेल दिया। बढ़ती लागत, बाजार की कमी और सरकारी उपेक्षा ने कारीगरों को मजदूरी और पलायन के रास्ते पर धकेल दिया। आज हालत यह है कि नई पीढ़ी बुनकरी को भविष्य का रास्ता नहीं मानती। ऐसे में बजट 2026 में घोषित महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल और चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क मधुबनी के लिए टर...