बोकारो, मई 10 -- मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में परिवार को संभालने वाली शक्ति का नाम है। बोकारो की अल्पना गिरि ने इसे सच साबित किया है। कठिन हालात में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार के लिए प्रेरणा बन गईं। अल्पना गिरि के पति गौरी शंकर सेक्टर-4 में कैंटीन चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। वर्ष 2017 में एक दुर्घटना में उनका पैर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद वे दिव्यांग हो गए। इस हादसे के बाद कैंटीन का काम बंद हो गया व परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी। इसी बीच कोरोना काल ने मुश्किलें और बढ़ा दीं। आमदनी के सारे रास्ते बंद हो गए। परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च व बेटे की पढ़ाई की चिंता खड़ी हो गई। ऐसे समय में अल्पना गिरि ने हिम्मत जुटाई और घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। यह भी पढ़ें- मदर्स डे प...