नई दिल्ली।, अगस्त 13 -- सुप्रीम कोर्ट में मदरसों और संस्कृत स्कूलों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (RTE) के दायरे में लाने की मांग उठी है। सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई की उन धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए अपनी सहमति दे दी है, जो अल्पसंख्यक स्कूलों, मदरसों, वैदिक पाठशालाओं और धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों को इस कानून के दायरे से बाहर रखती हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान द्वारा दायर इस जनहित याचिका (PIL) को स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता प्यारे जिया खान ने आरटीई एक्ट की धारा 1(4) और धारा 1(5) को संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), 15 (भेदभाव का निषेध), 21 (जीवन का अधिकार) और 21A (निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) का उल्ल...