चंदौली, मार्च 5 -- चंदौली, संवाददाता। माह-ए-रमजान महीने का दूसरा अशरा चल रहा है। इस अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इसलिए रोजेदारों ने इस अशरे में अपनी इबादतों में इजाफा कर दिया है। साथ ही गुनाहों से तौबा और माफी तलाफी कर रहे हैं। रोजेदारों का ज्यादा समय मस्जिदों में पाबंदी के साथ पांच वक्त की नमाज और अन्य इबादतों के साथ ही कुरआन की तिलावत में बीत रहा है। इस दौरान हदीस के हवाले से मुकद्दस रमजान माह की फजीलत भी बयान की जा रही है। मुख्यालय स्थित मदरसे में हदीस बयान करते हुए कारी अली अहमद ने कहा कि रमजान का महीना मजहबी और दुनियांवी तौर पर वक्त की पाबंदी, सच्चाई की कद्र, परहेजगारी, बड़ों का आदर, गरीबों पर रहम आदि कई चीजें सिखाता है। कहा कि रोजेदार को सारी बुराइयों से दूर रहना चाहिए। इससे अल्लाह अपने बंदे से राजी हो जाता है और उसके अगले और...
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