आजमगढ़, जून 21 -- सरायमीर, हिन्दुस्तान संवाद। मोहर्रम की चार तारीख के अवसर पर शनिवार को आयोजित मजलिसों और जुलूसों में हजरत इमाम हुसैन के छह माह के मासूम बेटे अली असगर की शहादत का मार्मिक तजकिरा किया गया। सरायमीर कस्बा सहित क्षेत्र के ओसती, खपड़ागांव और ओहदपुर में जुलूस निकाला गया। जिसमें शबीह, जुलजनाह, ताबूत, झूला, अलम की जियारत कराई गई। इस दौरान उलमा-ए-किराम ने कहा कि हजरत अली असगर की शहादत इंसानियत, सब्र और हक की राह में दी गई सबसे बड़ी कुर्बानियों में से एक है। यह भी पढ़ें- कर्बला दर्सगाह के साथ एक यूनिवर्सल यूनिवर्सिटी जुलूस और मजलिस का महत्व ओसती में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद आरज़ू हुसैन ने कहा कि कर्बला का पैगाम सिर्फ एक कौम के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने ज़ुल्म और अन्याय के सा...