गिरडीह, जनवरी 14 -- बगोदर। मौत के साए से निकलकर नाइजर से वापस लौटे मजदूरों ने जब अपहरण और अपहरण के दौरान 8 महीने 11 दिन की कहानी सुनाई तब लोगों का कलेजा कांप गया। चूंकि पूरी कहानी ही वैसी ही थी। मजदूरों को जहां एक तिरपाल के भरोसे पूरी बारिश का महीना काटना पड़ा वहीं कुर्ता - पैजामा पहनकर साढ़े आठ महीना गुजारना पड़ा। इस बीच दाढ़ी, मूंछ और बाल बनाने की भी इजाजत नहीं थी। जिंदा रहने के लिए खाना तो खाते थे मगर खाना मन पसंद नहीं होता था। बारिश के मौसम में पांचों मजदूरों को एक कमरे में कर दिया जाता था उसके बाद दो मजदूरों को अलग रखा जाता था। अपहरण के बाद जिस जगह पर मजदूरों को रखा गया था उससे थोड़ी दूरी पर अपराधियों का बसेरा था। वे हथियारों से लैस रहते थे। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल को लंच करने के कुछ देर बाद ही हथियारों से लैस होकर अपराधियों का झ...