महोबा, मई 9 -- महोबा, संवाददाता। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियां बेलाताल के बजरिया वार्ड निवासी रामलली कुशवाहा पर सटीक बैठती है। बीमारी ने पति को छीना को रामलली के ऊपर चार बेटियों और एक बेटा की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। मजदूरी और बटाई पर खेती कर रामलली ने बेटियों को ऐसी शिक्षा दी कि लोग आज जमकर सराहना कर रहे है। रामलली की दो बेटियां निधि और प्रज्ञा ने टॉप टेन में शामिल होकर परिजनों का नाम रोशन किया है। बेलाताल की रामलली पति गुलाब सिंह कुशवाहा की पांच संतानें है। यह भी पढ़ें- विषम परिस्थितियां भी नहीं डिगा पाई हौसला, निभाया फर्ज चार बेटियों संग एक बेटा है। दंपति को अपनी संतानों पर नाज था। बेटियों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने की मंशा को झटका लगा जब गुलाब सिंह ...