जमुई, जनवरी 8 -- झाझा । निज संवाददाता मकर संक्रांति का पर्व दस्तक दे रहा है। और....बगैर तिलकुट के पर्व भला मनाना कैसा। दही-चूड़ा के साथ जब तक लजीज तिलकुट न हो तो फिर पर्व का आनंद अधूरा ही रहता है। इसमें भी झाझा की तिलकुट के तो कहने ही क्या! ऐसे में पर्व की आहट समीप आते ही झाझा में तिलकुट का बाजार शबाब पर आ चूका है। वैसे तो ठंड के दस्तक देते ही बाजारों में तिलकुट की दुकानें सज जाया करती हैं। यह सिलसिला बीते कई दशकों से चला आ रहा है। किंतु अब मकर संक्रांति के समीप आते ही पूरा बाजार तिलकुट से ही पट गया जान पड़ता है। बताने की जरूरत नहीं कि झाझा में तिलकुट का रोजगार दशकों पुराना है और यह छठ पर्व के चंद दिनों बाद से ही शुरू होकर लगभग मध्य फरवरी तक जारी रहता आया है। रेलवे और बीड़ी के बाद करीब साढे़ तीन माह तक तिलकुटें ही मानों झाझा के रोजगारदारों क...
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