जमुई, मई 1 -- जमुई, कार्यालय संवाददाता दिहाड़ी मजदूरों के लिए 1 मई को भी काम करना मजबूरी है, क्योंकि उस दिन काम न करने का मतलब उस दिन की कमाई का नुकसान है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश मजदूरों को न तो इस दिन की छुट्टी मिलती है और न ही उनके लिए कोई विशेष कार्यक्रम होता है। यह केवल सरकारी दफ्तरों में छुट्टी या नेताओं/यूनियनों के भाषणों तक सीमित होकर रह गया है। 8 घंटे काम के जिस अधिकार को याद करने के लिए यह दिन मनाया जाता है, आज भी बहुत से मजदूरों को उससे अधिक समय तक काम करना पड़ता है। यह भी पढ़ें- मजदूरों को पता नहीं क्या होता है मजदूर दिवसजिले बड़े औद्योगिक कल कारखाने का निर्माण नहीं किया जा सका है। प्रतिदिन की तरह दिहाड़ी मजदूर अपने-अपने घरों से तैयार होकर नाश्ता व खाना लेकर ट्रेन के माध्यम से जमुई काम की तलाश में निकल पड़ते हैं...
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