मुजफ्फरपुर, मार्च 28 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। जिला स्कूल मैदान में पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का पहला दिन। बक्खो नाटक के साथ जब पर्दा उठा तो दर्शक मंच की चकाचौंध से स्मृतियों के अंधेरे तक के सफर का सहभागी बनते चले गए। दो किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती कहानी जिंदगी का पूरा फलसफा कह गई। एक तरफ वह प्रख्यात अभिनेता, जिसके इशारों पर कभी पूरा रंगमंच जीवंत हो उठता था तो दूसरी ओर उसका वफादार प्रॉम्प्टर, जो पर्दे के पीछे से उसे शब्द उधार देता था। उम्र और विस्मृति ने अभिनेता के चमकते कॅरियर को धुंधला कर दिया तो उसके बाद की परिस्थितियां कितना विचलित कर देती हैं, उसे रंगकर्मियों ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया। मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग...। फ़ैज अहमद फ़ैज की कालजयी नज़्म जब पृष्ठभूमि से गूंजती थी तो यह सिर्फ संगीत नहीं, बल...
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