मैनपुरी, मई 31 -- विकास खंड के ग्राम अजीजपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा रविवार को सुदामा चरित्र के प्रसंग और भव्य आरती के साथ संपन्न हो गई। कथावाचक आचार्य शीतल शास्त्री महाराज ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची मित्रता नि:स्वार्थ होती है। आज के भौतिकवादी युग में लोग स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाते हैं, जो टिकते नहीं हैं। आचार्य ने गुरु संदीपन के आश्रम का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सुदामा द्वारा चने छिपाकर खाने और कृष्ण से छल करने के कारण उन्हें दरिद्रता का सामना करना पड़ा, जबकि कृष्ण द्वारिकाधीश बने। बाद में पत्नी सुशीला के कहने पर जब सुदामा द्वारिका पहुंचे, तो मित्र की दयनीय हालत देखकर कृष्ण के आंसू छलक पड़े। यह भी पढ़ें- सुदामा चरित्र सुन छलके भक्ति के भाव उन्होंने कहा कि कथा श्रवण का असली लाभ तभी है, जब हम महापुरुषो...