भोजशाला केस में क्यों बेअसर रही Places of Worship Act की ढाल? समझिए कानूनी दांव-पेच
धार, मई 17 -- भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर अब देवी सरस्वती के मंदिर के तौर पर जाना जाएगा। ये फैसला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनाया है। इस फैसले से एक कानूनी बहस फिर उठ खड़ी हुई है- "क्या भोजशाला केस में Places of Worship Act को नजरअंदाज कर दिया गया है?" अगर आप इस एक्ट के बारे में नहीं जानते हैं, तो पहले इसे जानिए, फिर पूरी बहस को समझते हैं।पहले इस कानून को समझिए Places of Worship Act कहता है- "15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बदला नहीं जा सकता। साथ ही किसी स्थल के धार्मिक स्वरूप को अदालत में चुनौती देने पर भी रोक लगाई गई।" ऐसा करने की वजह एकदम साफ थी- इतिहास से जुड़े विवाद दोबारा न उभरें और समाज में हर वर्ग-समुदाय के बीच शांति बनी रहे। अब समझिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस एक्ट की ढाल इस केस में काम न आई। समझिए पू...
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