जौनपुर, जून 29 -- मछलीशहर, हिन्दुस्तान संवाद। गेहूं की फसल कटने के बाद शासन के निर्देशानुसार अप्रैल, मई और जून में अभियान चलाकर भूमि की पैमाइस कराई जाती है। हदबंदी के प्रकरण समय से निस्तारित होने पर किसान धान की खेती के लिए मेड़बंदी कर पाते हैं। समय पर पैमाइस होने से भूमि संबंधी विवादों का भी समाधान हो जाता है। भूमि विवाद के निस्तारण के लिए धारा 24 के तहत उपजिलाधिकारी न्यायालय में संबंधित भूमि का नक्शा, खसरा, खतौनी और बैंक में निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद चालान की प्रति के साथ वाद दाखिल किया जाता है। उपजिलाधिकारी के प्रारंभिक पैमाइस के आदेश के बाद संबंधित गांव के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल पैमाइस कर फील्ड बुक के साथ न्यायालय में प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। इसके बाद पक्षकारों को नोटिस जारी कर सुनवाई की जाती है और अंतिम आदेश पारि...