पटना, मई 22 -- राज्य में भूजल के अत्यधिक दोहन पर लगाम लगाया जाएगा। पीएचईडी की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। साथ ही अधिकारियों की टीम बनाकर गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में पानी जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार भूजल की अधिक निकासी से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2025 के बीच भूजल के उपयोग में काफी तेजी आई है। जहां 2004 में भूजल का उपयोग 10.77 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) था, वहीं 2025 में यह बढ़ कर 14.47 बीसीएम हो गया है। यह भी पढ़ें- नप के विस्तारित क्षेत्रों में पेयजल का संकट, जेई को मिला आदेश इसके मुकाबले भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज इतनी तेजी से नहीं बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक भूजल का उपयोग उसकी भरप...