विधि संवाददाता, फरवरी 28 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सूचीबद्ध मामलों की भारी संख्या के कारण एक न्यायाधीश ने खुले न्यायालय में ही निर्णय लिखाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वे भूखे, थके और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए आदेश सुरक्षित रखा जाता है। यह वाकया बीते मंगलवार का है। यह मामला न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ के समक्ष था। पीठ चंद्रलेखा सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वर्ष 2025 में डीआरटी के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। मई 2025 में हाईकोर्ट ने डीआरटी का आदेश निरस्त कर दोबारा सुनवाई को भेजा था। याची को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश रद्द कर दिया कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अव...