समस्तीपुर, मार्च 2 -- हार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड में स्थित भिड़हा गांव की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि पूर्वजों की सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत थाती है। लगभग 250 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी अपनी मूल भावना और अनुशासन को समेटे हुए है। ब्रज और वृंदावन की तर्ज पर शुरू हुई इस होली की परंपरा ने आधुनिक जमाने में भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए है। मर्यादा और अनुशासन का अनूठा उदाहरण भिड़हा की होली की सबसे बड़ी विशेषता है, जहां त्योहारों में अक्सर हुड़दंग देखने को मिलता है। वहीं, यहां के तीन दिवसीय उत्सव होलिका दहन, रंगोत्सव और मरजाद जैसी परंपरा सामूहिक अनुशासन का प्रमाण है। होली के हुड़दंग के बीच जाति, धर्म और वर्ग के भेद मिट जाते हैं। मालिक-मजदूर और हिंदू-मुस्लिम का एक साथ रंगों में सराबोर होकर चटक स...