भावों की पवित्रता तय करती है जीवन की गति: मुनि
गिरडीह, जुलाई 27 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिवस पर रविवार को राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि धर्म केवल बाहरी क्रियाओं से नहीं, बल्कि हमारे अंतःकरण के भावों से बनता है। जैसे भाव होंगे, वैसा ही नामकर्म बंधेगा और उसी के अनुरूप भविष्य का व्यक्तित्व एवं जीवन निर्मित होगा। उन्होंने कहा कि नामकर्म जीव के शरीर, आकृति, सौंदर्य, व्यक्तित्व तथा जन्म की गति का निर्धारण करता है। सरलता, भक्ति, दान, व्रत, तप और सात्त्विकता शुभ नामकर्म के कारण हैं, जबकि राग-द्वेष, अहंकार, हिंसा, असत्य और कषाययुक्त भाव अशुभ नामकर्म का बंध कराते हैं। मुनिश्री ने आगामी दशलक्षण पर्व पर युवाओं के लिए संस्कार एवं व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित करने की जानकारी देते हुए श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक युवाओं का पंजीकरण कराने का आह...
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