सहारनपुर, जनवरी 28 -- अनुसंधान एवं प्रकाशन के माध्यम से भारत के नवीन ज्ञान-विज्ञान (भारत-विद्या) के संवर्धन को समर्पित सहअरण्य प्राच्य शोध केन्द्र के तत्वावधान में डॉ. आकाश चंदा के प्रथम ऐतिहासिक शोध ग्रंथ की वैचारिक प्रस्तुति आयोजित की गई। कार्यक्रम में डॉ. चंदा ने शीघ्र प्रकाशित होने वाले अपने शोध ग्रंथ भारत विश्व सभ्यताओं से पूर्व ज्ञान-विज्ञान की मातृभूमि की मूल अवधारणा, शोध निष्कर्षों एवं ऐतिहासिक प्रमाणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. चंदा ने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान युद्धों या सम्राटों से नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों और सतत ज्ञान-परंपराओं से होती है, जिन्होंने इस भूमि को चेतना, विज्ञान और दर्शन का केंद्र बनाए रखा। पुस्तक की संपादक चंदा आकाश ने कहा कि यह ग्रंथ आस्था नहीं, बल्कि शास्त्रीय संदर्भों और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित है।...
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