भारत में न कोई भीड़ कानून से बड़ी है, न कोई धर्म, न कोई राजनीतिक दबाव
लखनऊ, मई 11 -- रितिका सिंह 'सिसोदिया', एडवोकेट, हाईकोर्ट, लखनऊ लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उसमें अधिकार भी हैं और उन अधिकारों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से पारिभाषित हैं। एक माह के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो फैसले, दो अलग-अलग समय में आए, लेकिन दोनों को मिलाकर पढ़ें तो एक स्पष्ट और संतुलित संवैधानिक दर्शन उभरकर सामने आता है। पहले फैसले में अदालत ने कहा था कि नमाजियों की संख्या सीमित करना गलत है, कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। दूसरे फैसले में अदालत ने कहा कि सार्वजनिक भूमि पर सबका समान अधिकार है और निजी स्थल पर भी धार्मिक स्वतंत्रता असीमित नहीं है। यदि कोई गतिविधि सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने लगे तो उसे नियंत्रित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। सरकार लोक व्यवस्था के छिन्न-भिन्न होने का इंतज...
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