बगहा, अगस्त 24 -- श्रीनगर । भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में चंपारण का योगदान अविस्मरणीय रहा है। चंपारण सत्याग्रह ने जहां मोहनदास करमचंद गांधी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, वहीं यहां के लोगों ने भारत छोड़ो आंदोलन में भी हिस्सा लिया। इसी आंदोलन में बैरिया के लौकरिया निवासी 13 वर्षीय छात्र जगन्नाथ पुरी ने आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। 1942 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था। 24 अगस्त 1942 को चंपारण जिले के विभिन्न गांवों से स्वतंत्रता सेनानी और हजारों लोग तिरंगा लेकर बेतिया पहुंचे थे। यह भी पढ़ें- अररिया: क्रांतिकारियों का नारा था-सलामी और गुलामी हटाओआजादी के लिए लड़ाई बेतिया के तत्कालीन अनुमंडल कार्यालय पर तिरंगा फहराने के लिए निकले जुलूस को अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारियों ने पुलिस ...