गोरखपुर, अगस्त 8 -- गोरखपुर, निज संवाददाता। ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में 8 अगस्त 1942 को शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन में गोरखपुर व आसपास के इलाकों से जोरदार प्रतिरोध देखने को मिला। सहजनवां स्थित डोहरिया कला आज भी इसका जीता-जागता उदाहरण पेश कर रहा है। यहां की माटी क्रांतिकारियों की माटी रही है, जो आखिरी ऐलान के क्रम में बरतानिया हुकूमत के विरुद्ध सीना ताने खड़े रहें और देश को स्वतंत्रता का स्वाद चखाया। यह भी पढ़ें- भारत छोड़ो आंदोलन के पूरे हुए 84 साल, बागपत के नौजवानों ने भी निभाई थी निर्णायक भूमिकाइतिहासकारों की दृष्टि इतिहासकारों के अनुसार, देश में लंबे समय से अंग्रेजी शासन के खिलाफ असंतोष था, लेकिन भारत छोड़ो आंदोलन के समय यह असंतोष एक निर्णायक जनआंदोलन के रूप में सामने आया। 8 अगस्त 1942 को बंबई में कांग्रेस द्वारा अंग्रेजों को भारत से ब...