बागपत, अगस्त 7 -- बड़ौत। देश की आजादी की लड़ाई में निर्णायक मोड़ साबित हुए भारत छोड़ो आंदोलन के 84 वर्ष पूरे हो गए हैं। आठ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'करो या मरो' का आह्वान करते हुए आंदोलन का बिगुल बजाया था। इसके बाद देशभर में आजादी की अलख ऐसी जगी कि गांव-गांव और शहर-शहर नौजवान अंग्रेजी शासन के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए। भारत छोड़ो आंदोलन भले ही महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ था, लेकिन इसे जनांदोलन का स्वरूप देने में देश के युवाओं और क्रांतिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा। बागपत की धरती के अनेक नौजवानों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में भाग लिया और आजादी की लड़ाई को मजबूती दी। उस दौर में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था। आंदोलनकारियों ...