नई दिल्ली, अप्रैल 12 -- भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि देश की कानूनी व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनों का अभाव नहीं, बल्कि आम नागरिकों की उन तक सीमित पहुंच है। उन्होंने कानूनी अधिकारों और उनकी व्यावहारिक उपलब्धता के बीच की खाई को पाटने के लिए तत्काल प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ जोन क्षेत्रीय सम्मेलन 'जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स: राइट्स, रिहैबिलिटेशन एंड रिफॉर्म फॉर द मोस्ट वल्नरेबल' को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि भारत में अधिकारों और नीतियों का मजबूत ढांचा मौजूद है, लेकिन दूरी, देरी और क्रियान्वयन की कमियों के कारण ये लाभ अक्सर जरूरतमंदों तक नहीं ...