नई दिल्ली, जनवरी 21 -- भारत और अमेरिका के बीच पिछले दो दशकों में बना रणनीतिक भरोसा आज अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रहा है। कभी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत के मुकाबले एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार माने जाने वाले ये दोनों देश अब कूटनीतिक गलतफहमियों, व्यापारिक टकराव और राजनीतिक अहम् के कारण दूरी की कगार पर खड़े हैं। अगर वाशिंगटन ने समय रहते अपने रवैये में सुधार नहीं किया, तो वह न केवल भारत जैसे निर्णायक वैश्विक साझेदार को खो सकता है, बल्कि एशिया में अपनी दीर्घकालिक रणनीति को भी कमजोर कर देगा।जनवरी 2025 से पहले सब ठीक था दरअसल, जनवरी 2025 में जब डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार वाइट हाउस में लौटे, तो अमेरिका-भारत संबंध अपने चरम पर थे। ऐसा स्तर जो 20वीं सदी में शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। स्वतंत्रता के बाद पहले 50 वर्षों में नई दिल...