हरिद्वार, अप्रैल 24 -- हरिद्वार, संवाददाता। देव संस्कृति विवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अपने यूरोप प्रवास के दौरान लिथुआनिया के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में पहुंचकर भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रभावी प्रसार किया। वहां के युवाओं और शोधार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। डॉ. पण्ड्या ने लिथुआनिया में अध्ययनरत मास्टर और पीएचडी के विद्यार्थियों का विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि उन्नत, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की कला है। उन्होंने समग्र शिक्षा, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक अध्यात्म के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राचीन भारतीय सिद्धांतों में आज की वैश्विक समस्याओं के समाधान निहित हैं। उन्होंने युवाओं को इन सिद्धांतों को जानने, ...