वाराणसी, अप्रैल 9 -- वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज में गुरुवार को सूर्योपासना के पुरा सांस्कृतिक अध्ययन पर संगोष्ठी हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला में सूर्य का स्थान अद्वितीय है। उन्होंने सूर्योपासना के ज्योतिषीय महत्व पर प्रकाश डाला। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में छात्रमंच 'संस्कृति' ने संगोष्ठी का आयोजन किया। संयोजक डॉ. ओमप्रकाश कुमार ने कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट किया। संकाय प्रमुख प्रो. प्रशांत कश्यप ने अध्यक्षता की। इस दौरान विद्यार्थियों ने शैल चित्रकला में सूर्योपासना, सिंधु-सरस्वती सभ्यता की मुहरों पर स्वास्तिक, सूर्य के चिह्न की वैज्ञानिकता, वैदिक काल में गायत्री मंत्र, ऋग्वेद के सूक्तों का सस्वर पाठ, सूर्य को जगत की आत्मा, रामायण और महाभारत कालीन प्रसंगों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। उन्हो...