वाराणसी, दिसम्बर 30 -- वाराणसी। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्व. राजनारायण दूसरे नेताओं के मुकाबिल अलग खड़े दिखते हैं। अपने फक्कड़ समाजवादी स्वभाव के चलते लोग अक्सर उन्हें अक्खड़ कहा करते थे, लेकिन अपने विचारों के साथ व्यवस्था के खिलाफ अडिग रहना और जीत हासिल करना जैसे उनकी आदत में शुमार था। 31 दिसंबर, राजनारायण की पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करते हुए प्रदेश के पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रताप कहते हैं कि वस्तुत: उस समाजवादी नेता को भारतीय राजनीति का कबीर कहना ज्यादा उचित होगा। संत कबीर की बानी- 'कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाठा हाथ, जो घर जारे आपना चलै हमारे साथ' राजनारायण पर बिल्कुल सटीक बैठती है। उन्होंने काशी की सधुक्कड़ी को पूरी तरह आत्मसात कर रखा था। समाज के पिछले तबकों के प्रति वह जितने संवेदनशील थे, उतना ही कठोर अव्यवस्था के विरुद्ध होते...
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