प्रयागराज, नवम्बर 17 -- प्रयागराज, संवाददाता। इलाहाबाद संग्रहालय की ओर से सोमवार को 'वैदिक न्यायशास्त्र की प्रासंगिकता' विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति व विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीएस चौहान ने संविधान, अनुच्छेदों, धाराओं व भारतीय ग्रंथों के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से अपनी बात रखी। जस्टिस चौहान ने बताया कि आधुनिक भारतीय न्याय व्यवस्था पश्चिमी औपनिवेशिक काल से प्रेरित है जबकि भारतीय न्यायशास्त्र की प्राचीन अवधारणा वेदों के धार्मिक व नैतिक सिद्धांतों पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि वेदों में न्याय व्यवस्था की विस्तृत व्याख्या की गई है। भारतीय परंपरा में राजा सर्वोच्च न होकर धर्म के अधीन था और विधि का शासन ही सर्वोच्च था। जस्टिस चौहान ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक आदर्श वाक्य 'यतो धर्म...