गढ़वा, मार्च 19 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। भारतीय नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन का सूचक नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि में नवजीवन के संचार का पावन पर्व है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला यह नववर्ष भारतीय संस्कृति, प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। यह वह कालखंड है जब प्रकृति अपने नवयौवन में प्रवेश करती है और समस्त चराचर जगत एक नई ऊर्जा, नई आशा और नई स्फूर्ति से परिपूर्ण हो उठता है। उक्त बातें संस्कार भारती झारखंड प्रांत के कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर स्वर्गीय ने कही। श्रीधर ने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार इसी पावन दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना का प्रारंभ किया था। इसलिए यह दिन केवल एक कालगणना का आरंभ नहीं, बल्कि सृष्टि के जन्म का प्रतीक भी है। इस दृष्टि से भारतीय नववर्ष को सृष्टि का नववर्...