गोरखपुर, सितम्बर 18 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के शिक्षा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. राजशरण शाही ने कहा कि भारत में शिक्षा की परंपरा पात्रता की परंपरा है। यह परंपरा समाज में व्याप्त सभी प्रकार के विभेदों, विषमताओं और कुरीतियों को समाप्त करने की परंपरा है। भारतीय ज्ञान परंपरा मात्र मस्तिष्क के विकास की परंपरा नहीं है, यह सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की परंपरा है। प्रो. शाही बुधवार को दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के पावन स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा पर उन्होंने कहा कि आज शिक्षा को केवल रोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि भारतीय चिंतन...